STORYMIRROR

shikha rani

Abstract Others

2  

shikha rani

Abstract Others

सजा लो जिन्दगी ऐसी की,

सजा लो जिन्दगी ऐसी की,

1 min
54

सजा लो जिन्दगी ऐसी की

गिरता झरना भी शरमाये

लगें तब चाँद भी आईना

तुम्हारी नज़र जो उधर जाए 

बन जाओ तुम ही अब सूरज  

अंधेरे खुद ही मिट जाए

सजा लो जिन्दगी ऐसी की

गिरता झरना भी शरमाये


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract