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S N Sharma

Romance

4  

S N Sharma

Romance

सिर्फ तुम

सिर्फ तुम

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मेरी सांसों की महक में

मेरी आंखों की चमक में

मन के इस नीले गगन में

और मेरे तन बदन में।

कौन रहता है बताओ

बस तुम्ही हो सिर्फ तुम।

ना मुझे दुनिया की ख्वाहिश

ना गगन छूने की कोशिश

आरजू किसको चमन की

न एशो इशरत और न धन की।

जानती हो क्या है मेरी तमन्ना।

बस तुम्ही हो सिर्फ तुम।।


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