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Gaurav Chhabra

Tragedy

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Gaurav Chhabra

Tragedy

सिप्स ऑफ़ ईगो

सिप्स ऑफ़ ईगो

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दो जाम से जाम टकराए और गिर कर टूट गए

ऐसे गिरे के दो साथी रूठ गए


बेरंग हो गई वो रंगीन शामें और बेजान

हो गई महफिलों की रौनक

जब कुछ दोस्त अहम के प्यालों में डूब गए



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