Gaurav Chhabra
Tragedy
दो जाम से जाम टकराए और गिर कर टूट गए
ऐसे गिरे के दो साथी रूठ गए
बेरंग हो गई वो रंगीन शामें और बेजान
हो गई महफिलों की रौनक
जब कुछ दोस्त अहम के प्यालों में डूब गए
हे नारी तुम्ह...
तुम मैं और तु...
बहुत उदास है ...
भाई तू शायद भ...
जब... (होता ह...
क्या और कौन र...
मास्क और प्या...
मैं एक चॉकलेट...
तू चला गया क्...
शब्द अनजान है...
ये बेड़िया कर रही है अब मेरे पैरो को ज़ख़्मी। मैं ज़ख़्मी हो चुकी हूँ। ये बेड़िया कर रही है अब मेरे पैरो को ज़ख़्मी। मैं ज़ख़्मी हो चुकी हूँ।
लेकिन मेहनत ? मैं उलटे पाँव शहर वापस लौट आया। लेकिन मेहनत ? मैं उलटे पाँव शहर वापस लौट आया।
पहली बार खुद के लिए सोचा तो तूने उसे सबके सामने बेइज़्ज़त कर दिया ? पहली बार खुद के लिए सोचा तो तूने उसे सबके सामने बेइज़्ज़त कर दिया ?
कोख की तलाश में जहाँ लड़के और लड़की में कोई फर्क न हो। कोख की तलाश में जहाँ लड़के और लड़की में कोई फर्क न हो।
निशा के लिए भाई ही मां बाप दोस्त सब था। निशा के लिए भाई ही मां बाप दोस्त सब था।
मेरी पुरखों की मिटटी मेरा अधिकार है मेरा हक़ लौटना आपका सामाजिक सरोकार है। मेरी पुरखों की मिटटी मेरा अधिकार है मेरा हक़ लौटना आपका सामाजिक सरोकार है।
मेरी मेहनत की आज लगी है , अरावली - सी पहाड़ी । मजदूरी तो बहुत की है, मेरी मेहनत की आज लगी है , अरावली - सी पहाड़ी । मजदूरी तो बहुत की है,
न जाने क्यों उसे उस मासूम के आँसू नहीं दिख रहे थे। न जाने क्यों उसे उस मासूम के आँसू नहीं दिख रहे थे।
थी मैं जब बहुत छोटी ना मैं पाती थी ठीक से चल ना मैं पाती थी सही से बोल थी मैं जब बहुत छोटी ना मैं पाती थी ठीक से चल ना मैं पाती थी सही से बोल
और अचानक ही ..माँ !..माँ ! माँ !" कह कर फूट- फूट के रो पड़ा ! और अचानक ही ..माँ !..माँ ! माँ !" कह कर फूट- फूट के रो पड़ा !
जिंदगी के सफर में , वो ही तो हमें चलना सिखाते, पथ के कांटों को दूर कर, वो साथ हमारा निभाते।। जिंदगी के सफर में , वो ही तो हमें चलना सिखाते, पथ के कांटों को दूर कर, वो साथ...
रह रह कर उस लड़की की बात मेरे ज़हन मे गूंज रही थी कि "तुम इंसानियत के नाम पर कलंक हो...l" रह रह कर उस लड़की की बात मेरे ज़हन मे गूंज रही थी कि "तुम इंसानियत के नाम पर कलंक ...
कुछ तो खौफ रखो उस ऊपर वाले का जो देता है सौगात एक औरत को माँ बनने का कुछ तो खौफ रखो उस ऊपर वाले का जो देता है सौगात एक औरत को माँ बनने का
कोई तो पूछो इन शैतानों से, कि हमने कब कहा था इन्हें कि तुम...........हमें यूँ........ कोई तो पूछो इन शैतानों से, कि हमने कब कहा था इन्हें कि तुम...........हमें यूँ......
वो कहते हैं, तू लड़की है शाम ढले घर से क्यूँ निकलती है ? वो कहते हैं, तू लड़की है शाम ढले घर से क्यूँ निकलती है ?
मैं लड़का हूं और लड़का होने में मेरी कोई भागीदारी नहीं है। मैं लड़का हूं और लड़का होने में मेरी कोई भागीदारी नहीं है।
कहता है तुम खा लो भर पेट मन ना करे तो छोड़ दो प्लेट मैं उस में से ही चख लूँगा रूखा स... कहता है तुम खा लो भर पेट मन ना करे तो छोड़ दो प्लेट मैं उस में से ही...
पापा का सामान साथ में क्यूँ लाई है। साथ में क्यूँ लाई है वो मेडलों के हार, आँख में आँसू क्यूँ ... पापा का सामान साथ में क्यूँ लाई है। साथ में क्यूँ लाई है वो मेडलों के हार, ...
रोते रोते अचानक, फिरदौस होश खो गई.. लाखो सपने लिए, वो तो खामोश हो गई..!! रोते रोते अचानक, फिरदौस होश खो गई.. लाखो सपने लिए, वो तो खामोश हो गई..!!
स्पष्ट निर्देश दे गए कि अब मैं सो सकता था एक बहुत लंबी नींद चैन से, अभिमान से। स्पष्ट निर्देश दे गए कि अब मैं सो सकता था एक बहुत लंबी नींद चैन से, अभि...