STORYMIRROR

Gaurav Chhabra

Abstract

3  

Gaurav Chhabra

Abstract

भाई तू शायद भूल गया होगा!

भाई तू शायद भूल गया होगा!

1 min
254

अभी तक संजो कर रखे है मैंने वो सारे पल......

भाई तू शायद भूल गया होगा!

तूने एक बार मुझे बर्थडे पर एक जूते रूपी सांचे में ढला विभिन्न इस्तेमाल में लाये जाने वाला चीनी का एक मग दिया था

वह मग एक कार्टून करैक्टर प्रतीत होता था, उसके दो पैर थे पर कान एक ही था

मैं उसे इस्तेमाल भी करता था खेलता भी था

जब उस मग का एक पैर टूट गया तो मैंने बहुत दुखी हुआ था

उसे चिपकाने के लिए फेविकोल, टेप, सरस सब लगाया था

तब मुझे जीवन एक महत्वपूर्ण सबक समझ आया था


"हर रिश्ता अमूल्य है इसे बहुत सहेज कर रखो|"

तो भाई शुक्रिया मेरे हर पल में रहने के लिए |


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract