STORYMIRROR

Gaurav Chhabra

Abstract Tragedy Classics

3  

Gaurav Chhabra

Abstract Tragedy Classics

बहुत उदास है आज ये मन

बहुत उदास है आज ये मन

1 min
450

बहुत उदास है आज ये मन

पैर पसार रहा खालीपन

किस ओर जाऊं कहाँ से लाऊं

खुशियों में डूबा सिर्फ एक क्षण 


ना कोई अपना है, ना है कोई बेगाना 

सब जगह भीड़ है, पर मेरे अंदर सूनापन 


ना कोई दोस्त है, ना है कोई दुश्मन 

मुलाकातों का दौर है, पर बिना कोई स्पंदन 


बहुत उदास है आज ये मन

पैर पसार रहा खालीपन।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract