STORYMIRROR

Kamlesh Ahuja

Abstract

3  

Kamlesh Ahuja

Abstract

तू भी आजा प्रिय होली में

तू भी आजा प्रिय होली में

1 min
333

फागुन का महीना आया,

तू भी आजा प्रिय होली में।


कोरी कोरी मोरी चुनरिया,

रंग जा आकर होली में।


लाल, गुलाबी, नीला, हरा,

देखे बहुत से रंग होली में।


तू जो छू ले इक बार प्यार से, 

खिल जाए हर अंग होली में।


अब न शरमाऊँगी, न घबराऊँगी,

 रंग में तेरे रंग जाऊंगी होली में।


तेरा साथ है तो फिर प्यारा लगे,

जीवन का हर रंग होली में।


तू ही जीवन मेरा, तेरे ही संग रहना,

होली सदा के लिए, तेरी मैं होली में।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract