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Satyendra Gupta

Abstract

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Satyendra Gupta

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शुरुआत और अंत

शुरुआत और अंत

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शुरुवात और अंत 

दोनो की अपनी कहानी है

शुरुवात में उमंग 

और अंत में उदासी आनी है।


शुरुवात में सुबह चहकती है

कई उम्मीदों को लेकर आती है

अंत में शाम की कहानी है

दिन भर की भरपाई की जुबानी है।


शुरुवात में बचपन की अपनी कहानी है

बिना टेंशन की बचपन बितानी है

अंत में बुढ़ापा आता है

ना जाने कितने दुख लाता है


शुरुवात में विद्यार्थी कर ले मेहनत

बाद में मेहनत रंग लाता है

शुरुवात की अच्छी सोच से ही

अंत में अच्छे पद को पाता है।


शुरुवात में डाल दे बच्चो को संस्कार अच्छे

बच्चे संस्कारी होते जायेंगे

अंत होगा ऐसा की 

आपके बच्चे संस्कारी कहलाएंगे।


शुरुवात करो ऐसा की 

अंत का इंतजार सुहाना लगे

शुरुवात हो अच्छा तो 

अंत भी रुहाना लगे

शुरुवात हो मस्त तो 

अंत भी मस्ताना लगे

शुरुवात और अंत को समझ जाओ

तो जीवन में कभी नहीं पछताना पड़े।।


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