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Rashmi Lata Mishra

Drama

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Rashmi Lata Mishra

Drama

श्रम

श्रम

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श्रम सिंचित पगार ही

मेरा जीवन आधार है

वैभव से मेरा न कोई

सरोकार है।


दो हाथों में,

ताकत बेशुमार है

इन्हीं के दम पे चले

दुनिया का कारोबार है।


श्रम बिन बने ना काम

श्रम ही है भगवान

दोनों ही फल देते

करे जैसा कर्म सुजान।


मजदूर दिवस की भी

तो हुई कर्मो से पहचान

तो मिलकर करे

इस दिवस को सलाम।


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