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Nand Kumar

Tragedy


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Nand Kumar

Tragedy


शिक्षक शिक्षार्थी और कोरोना

शिक्षक शिक्षार्थी और कोरोना

1 min 305 1 min 305

पुस्तक शिक्षक शिक्षार्थी ,

 में दूरी अधिक बढाई।

कोरोना की लहरों ने आ ,

चौपट करी पढाई ।।


आनलाइन पढ़ते समर्थ ,

बन गयी गरीबी बाधक।

कहां से ले मोबाइल डाटा ,

निर्धनता के साधक ।।


एक वर्ष से अधिक भयातुर ,

दुबक घरों में दिन काटे ।

पांच किलो राशन में सबने ,

सोचो कैसे दिन काटे ।।


कारोबार हुआ सब चौपट ,

क्लास कोचिगे बंद हुई ।

प्राइवेट शिक्षक पिसा अधिक ,

उसको ना राहत प्राप्त हुई ।।


जो जग का भविष्य गढते ,

उनका जीना दुश्वार हुआ ।

शिक्षण से अच्छे अन्य कार्य ,

सोचने को मन लाचार हुआ।।


पाया कुछ भी नही सभी ने , 

कुछ ना कुछ अपना खोया ।

चली गई मुस्कान हंसी सब ,

हुआ दुखी जन जन रोया ।। 



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