"शीतलासप्तमी पर्व सुहाना"
"शीतलासप्तमी पर्व सुहाना"
शीतला सप्तमी का पर्व आया है,बहुत सुहाना
आज शीतला मां के भोग लगाते है,ठंडा खाना
एक-दूजे के लगाते रंग-गुलाल साथ गाते गाना
'ओल्या' विशेष साथ मे पकवान खाते नाना
सौहाद्र,भाईचारे का यह पर्व है,बेहद,सुहाना
शाम लगा रहता,एक-दूजे के घर आना-जाना
पर साखी आजकल खो गया,सौहाद्र खजाना
सबने पहने घमंड,अहम के बड़े ऊंचे पायजामा
मित्रों में भी नही रहा है,पहले जैसा दोस्ताना
अब खिलाते है,होली,बुरा मान देते है,ताना
कपड़े खराब कर दिये,तू क्या पागल तराना
मित्रता,में आ गया दिखावे का आना-जाना
साथ ही प्राकृतिक रंगों का दस्तूर हुआ,पुराना
जिसके कारण चर्म रोगों का आ गया,ज़माना
छोड़ दो कृत्रिमता,अपनाओ तुम प्राकृतिकता
होली खेलोगे पेड़-पौधों से,सीखोगे,मुस्कुराना
गम कोई भी हो,चाहिए भीतर सँघर्ष तुफाना
जो प्रकृति साथ रचते जिंदगी का ताना-बाना
ओर बेजुबानों पशुओं से रखते नित दोस्ताना
वो जिंदगी होती रंगीन गाती नित सुंदर गाना।
