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Chandrakala Bhartiya

Tragedy

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Chandrakala Bhartiya

Tragedy

शहिद- ए- आजम

शहिद- ए- आजम

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नारा इंकलाब का गुंजाया

बसंती चोला तन पर धारा

देश आजाद करने की ठानी

जान हथेली पर ले, चले सीना तान।


भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरु

भरी जवानी हुंकार आजादी भरते थे

सिंह गर्जना करते, बेफिक्र हो घूमते थे

जोश भरी ललकार से, फिरंगी डरते थे


" वंदेमातरम् "गाकर सोए मुर्दे जगाए थे

अन्याय, जुल्म न सहो कभी

अलख जगाए फिरते थे।

असेंबली में बम फेंका, निडरता की मिसाल थे

भरी जवानी हंसते- हंसते फांसी पर

 झूले।


भारत माता के वीर सपूतों

करती ' चंदा' शत शत नमन तुम्हें।

हे परम वीर, हे शहीद बलिदानी

सदियों अजर- अमर रहोगे तुम।



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