STORYMIRROR

Amita Dash

Tragedy

3  

Amita Dash

Tragedy

शब्दों के मोती - ज़रा ठहर

शब्दों के मोती - ज़रा ठहर

1 min
190

उम्र के इस पड़ाव पर

गम के सागर में डुबकर

आंखों की रोशनी छिनकर

कमजोर हाथ में कलम पकड़कर।

हे, उदास मन

क्या लिख पाओगे अब?


हे हवा, तु ज़रा ठहर

फूलों के महक के साथ

उडाले मेरे कविता के शब्द

पहुंचा दे मेरे श्रोताओं के पास

मैं अब भगवान के पास जाने के कतार पर।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy