लम्हें जिन्दगी के
लम्हें जिन्दगी के
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हर समय नानी के नाक पर रहता था गुस्सा
लेकिन उसके पेड़ का बेर था मीठा
सुबह, शाम पेड़ के नीचे हम बच्चे होते थे इकट्ठा
मेरा भाई बेर के चक्कर में पढ़ाई न करता
बिना स्कूल जाए दोपहर को वहीं बैठता
कब एक बेर गिरे तांक-झांक करता रहता
चटाई डाल के वहीं सो जाता
एक दिन नानी डंडा फेंकी तो
उसे न लग के मुझे लगा
भगवान गुस्से वाली के घर में मीठा बेर क्यों दिया..
