सच्चा मित्र
सच्चा मित्र
सच्ची मित्रता
सच्ची मित्रता वो एहसास है,
जो हर दर्द में पास हो।
जो खुशी में संग मुस्काए ,
दुख में कंधे का सहारा बने।
न धन से तोली जाए कभी,
न स्वार्थ की उसमें छाया हो,
बस दिल से दिल का बंधन हो,
और साथ में अपनापन हो।
वो बातों में छिपी मुस्कान हो,
वो चुप में भी पहचान हो,
कभी डांटे, कभी मनाए,
फिर भी हर हाल में रिश्तें निभाए।
राहें कठिन हों या हो अंधेरा,
मित्र ही बनता है उम्मीदों का सवेरा।
हर खुशी को दोगुना कर दे,
हय ग़म को जो भूला दे।
ऐसी होती है सच्ची दोस्ती,
न कभी रुके, न कभी थमें।
दिल से दिल की जुड़ी ये डोर,
मित्रता ही सबसे प्यारा भोर ।
