साथ चाहिए..
साथ चाहिए..
साथ चाहिए
पर..
कदम दो कदम का नहीं..!
साथ चाहिए
पर..
तस्वीर खिंचवाने के लिए नहीं..!
ना ही पल दो पल का
या फिर..
चाय कॉफी पीने तक नहीं..!
मेरे कर्मो का लेखा जोखा बताने को भी नहीं..!
तस्वीर में खड़े होना
दो चार कदम चलना
चाय कॉफी पीना
कोई भी कर सकता है..!
मुझे साथ देना हो तो यूँ देना
मानो ख़ुद से वफ़ा ए इश्क़ कर रहे हो
यूँ कि.. ख़ामियों को दूर कर निखारे जा रहे हो ख़ुद ही के
मानो तन मैं और तुम प्राण बन जा रहे हो
बस कुछ यूँ ही साथ देना कि..
साँसे मैं लूँ और धड़कन तुम्हारी चल रही हो..!
दे सकते हो तो समानांतर बन चलो
साथ में सुख दुःख की तरह..
बोलो बनोगे ऐसे साथी साथ चलने को
हाँ.. तो फिर ठीक है चलो अंतिम साँस तक
या चलोगे तुम भी मझधार तक..

