STORYMIRROR

Kamini sajal Soni

Abstract

3  

Kamini sajal Soni

Abstract

सांवरे के रंग रंगी मैं

सांवरे के रंग रंगी मैं

1 min
321

ओ सांवरे मोपे ना डारो

ना भिगाओ मोरी सारी

काहे डालें अबीर गुलाल

दूंगी मैं तोको गारी।


केसर का रंग बनाकर

हरे बांस की पिचकारी।

तूने ऐसो रंग डारो सांवरे

हो गई मैं तो बावरी।


अपने ही रंग में रंग लो मुझको

होली के रंग ना भाये

देख के तेरी मोहिनी सूरत

तन मन हर्षा जाए।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract