"साम्राज्य"
"साम्राज्य"
है लालसा साम्राज्य की विकट बड़ी
चढ़ जाए यदि सिर पर यह कभी
उचित अनुचित तनिक ना सोचे
पाप पुण्य ना जाने ये
नरसंहार मचा दे ये
लोगों को क्या से क्या बना दे ये
डरे नहीं ये हटे नहीं ये
कितनों का खून बहा दे ये
हाहाकार मचा दे ये
कितनों का करदे घर सूना ये
कितनो को अनाथ बना दे ये ll
है लालसा साम्रज्य की विकट बड़ी
चढ़ जाए यदि सिर पर यह सिर्फ कभी
थी भूख दुर्योधन को साम्राज्य की बड़ी
रच डाली थी महाभारत तभी
सिकंदर ने साम्राज्य पाने को
क्या-क्या नहीं खेल रचाया उसने
जाने कितने ऐसे नाम हुए
मिट गए और मिटा दिया कितनों को
इंसान नहीं रह पाए वो
खुद को अंदर तक मार दिया
लालसा साम्राज्य की पाने को ll
है लालसा साम्राज्य की विकट बड़ी
चढ़ जाये यदि सिर पर यह कभी।
