STORYMIRROR

नम्रता सिंह नमी

Romance

3  

नम्रता सिंह नमी

Romance

रंग

रंग

1 min
221


कैसा होता है रंग पिया का 

जब भी तुझको देखूँ गाल गुलाबी हो जाते हैं 

अपनी आँखों में सतरंगी सपने तेरे संग समाये हैं।


लाल रंग में रंग जाती हूँ तेरे एक छुअन से मैं 

पीले रंग में रंग देते हो बाहों में भर कर तुम 

नारंगी रंग है डाला तुमने अपना कह कर 

हरा रंग बिखरा है यूँ मेरे आसपास 

जैसे तुम यहीं चुपके से कहीं देखते हो मुझको।


कभी विरह की अगन में बेरंग हो जाती हूँ मैं 

तेरी एक छुअन से सतरंगी हो जाती हूँ।


यूँ ही रहो तुम पास मेरे और रोज रंग भरते रहो 

कभी सपनो में कभी हकीकत में 

रोज अरमान यूँ पलते रहें।


बस ज़िन्दगी तेरे नाम का रंग रंगती रहे

ओर निखर जाऊँ रोज इस रंग में मैं।


पिया कुछ यूँ ही भरते रहो रंग अपने प्रेम का

बन्द करके पलकों को बस जीती रहुं मैं तुझ में।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from नम्रता सिंह नमी

Similar hindi poem from Romance