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Chandresh Kumar Chhatlani

Inspirational

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Chandresh Kumar Chhatlani

Inspirational

रिश्ते

रिश्ते

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कुछ रिश्ते प्रेम की अलौकिक छाया में हैं निभते,

कुछ काल के भँवर में बहकर विस्मृत हो हैं जाते।


कुछ नाते, डूबते सूरज की लौ सी हैं मिट जाते,

कुछ अँधेरे में चाँदनी बन कर याद हैं आते।


कुछ मृगतृष्णा बन झूठे सुख का स्वप्न दिखलाएँ,

कुछ सच्चे साथी धूप में छाँव बनकर आएँ।


कोई बंधन सहज साँस सा मन को है छू जाए,

कोई मर्म में गड़े काँटा सा दर्द बड़ा बन जाए।


कोई जीवन का सुर बन संगीत में घुल जाए,

कोई विषाद का गीत बन हृदय से धुल जाए।


कुछ रिश्ते बरसात की बूँद से सहारा बन कर आएं,

कुछ बिन बुलाए मेहमान से आकर, द्वार पर मुस्काएं।


कुछ राहों में बिखरे कांटों से बन जाएं,

कुछ अपनेपन के फूल चुपके से महकाएं।


रिश्तों का यह संसार भावों का महाकाव्य हो,

जहाँ प्रेम ही सच हो, बाकी माया का अध्याय हो।


न टूटे वही डोर, जो दिल की बातें समझे,

आत्मा को छुए जो, ही कहलाएं रिश्ते।


सच्चा रिश्ता है वही, समय की छाँव हो, धूप हो,

प्रेम के पत्ते न मुरझाए, ऐसा ही स्वरूप हो।


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