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Shailaja Pathak

Abstract

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Shailaja Pathak

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रिश्ते

रिश्ते

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भिगोए थे ये रिश्ते पतीले में मैंने,

और बांध दिए थे एक गांठ में,


देखूंगी कल सबेरे जब इन्हें,

मिलेंगे मुझे फूले फले और उगे हुुए।


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