STORYMIRROR

Ankit Tripathi

Romance

4  

Ankit Tripathi

Romance

रहने दो

रहने दो

1 min
132

रहने दो अब हरेक तसल्ली झूठी झूठी लगती है

रहने दो अब वो लड़की भी रूठी रूठी लगती है

जिसकी खातिर मैंने नींदों से झगड़ा मोल लिया

जिसको मैंने अपनी जगती रातों से तोल दिया

ख़्वाब तुम्हारा ही था क्या जो ग़ज़लों में आया था

वह नज़्म तुम्हीं पर थी जिसको मैंने फरमाया था

मुझको अब अपनी इस दूरी की तन्हाई सहने दो,

ये तसल्ली मत दो मुझको तनहा तनहा रहने दो।


जैसे हर एक अकेले का अख़बार सहारा होता है

वैसे मेरे जीवन का मुश्किल से गुजारा होता है

जब जब उसकी यादें बिना बताए घर आती हैं

मेरी तनहाई देख उन्हें जब थोड़ी शरमा जाती है

माना ये बात नहीं वाजिब खुशियों के गलियारों में

पर देखो मुझको एक दफा ये आंसू के अंगारों में

मेरी कलम किसी एक की खातिर बस चलने दो

ये तसल्ली मत दो मुझको तनहा तनहा रहने दो।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance