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Sangeeta Ashok Kothari

Romance

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Sangeeta Ashok Kothari

Romance

राज़ -ए -मोहब्बत

राज़ -ए -मोहब्बत

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बाज़ार से लौटते समय छत की मुंडेर पर उसे देखा,

निर्मल, पावन खूबसूरती देख मेरे होश हुए फ़ाख्ता,

झील सी आँखें, लहराते बाल लग रही थी देवकन्या,


गली के बीचो बीच ताड़ता रहा मैं स्कूटर पर बैठा -बैठा,

मोहब्बत हो गयी थी उससे पर मैं समझ नहीं पा रहा,

शायद पहली नज़र का प्यार जिसे सारा ज़माना कहता।।


राज़ -ए-मोहब्बत क्या बताऊँ मेरा रोम- रोम खिल उठा,

जब धीमे से पलकें उठा, होंठ खोल,हाथ हिलाकर हाय कहा,

बत्तीसी दिखा, बांछे खिला मैं तो शर्माता रह गया,


लाल-लाल कपोल हो गये मेरे और तन मन सिहरने लगा,

ज़ोर से गाड़ियों के हॉर्न/भोंपू बजने से मैं होश में आया,

कान पर मोबाइल रख उँगलियाँ से नंबर देने का इशारा किया।।


कागज़ पर नंबर लिख नज़रे बचा उसने वो पन्ना फेंका,

मैं अवाक, हतप्रभ रह गया अब ख़ुद पर रश्क़ होने लगा,

अब मेरा मन और स्कूटर दोनों दुगुनी रफ़्तार से दौड़ने लगा,


दिल को सँभालते, मुस्कुराते घर पहुँच माँ को वाकया बताया,

माँ बोली, "पगले ! इसी लड़की का तो तेरे लिए रिश्ता आया",

राज़-ए-मोहब्बत क्या बताऊँ कि जोड़ियाँ ऊपरवाला बनाता।।


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