राह
राह
तिनका - तिनका जोड़कर जो बनाया था आशियाना
आज उसी के दीवारों में कैद होकर रहे गये
पंख फैलाकर उड़े थे आसमा की ओर
धरती पे आ के गिरे
जो राह हमने चुनी उसी पर भटक कर रहे गये
किस्मत ने हमेशा हमें दोराहें पर खड़ा किया
समुद्र से लड़ते लड़ते हम लहरों में खो गये
अपने ही हमें भंवर में अकेला छोड़कर चले गए
किए हजारों समझौता फिर भी अकेले रह गये
मन में खिले फूल मन में ही मुरझा गये।
