राधाकृष्ण की जोड़ी
राधाकृष्ण की जोड़ी
एक नंदकिशोर और एक नंदकिशोरी
एक साँवला और एक गोरी,
जैसे चाँद और चकोरी।
जग से निराली सी है थोड़ी,
राधाकृष्ण की जोड़ी।
मन को लुभाती है,
यह प्रेम जोड़ी।
प्रेम की परिभाषा समझाती है,
राधाकृष्ण की जोड़ी।
राधा-रानी पुकार लें प्रेम से तो,
कृष्ण आ जाएँ दौड़े-दौड़े।
कृष्ण की बाँसुरी की तान सुनने,
राधा-रानी जाएंँ दौड़ी-दौड़ी।
ऐसी ही अनोखी सी है थोड़ी,
राधाकृष्ण की जोड़ी।
राधा-रानी से कृष्ण,
बिछड़ कर भी नहीं बिछड़े किसी क्षण में।
कृष्ण तो बसे हैं,
राधा-रानी के प्राणों में।
तभी तो हर जगह नजर आते हैं,
खूबसूरत से जोड़े में।
हर मंदिर में पूजे जाते हैं,
सदैव जोड़े में।
राधा-रानी हैं,
कृष्ण बिन आधी-अधूरी।
कृष्ण भी तो हैं,
राधा-रानी बिन अधूरे-अधूरे।
दोनों खड़े हों साथ जोड़े में,
तभी तो राधाकृष्ण होते हैं पूरे।
राधा-रानी ने सही,
कृष्ण से बरसों दूरी।
आँखों की जोड़ी जैसी थी,
राधाकृष्ण की जोड़ी।
एक-दूसरे को देखे बिन भी,
सदा साथ रही यह जोड़ी।
जग से निराली सी है थोड़ी,
राधाकृष्ण की जोड़ी।
किसी दिन तो राधा-रानी ने,
पूछा ही होगा कृष्ण से।
क्यों नहीं हम दोनों,
एक-दूसरे की किस्मत में।
प्रेम का अर्थ नहीं सिर्फ पाना।
प्रेम का यही सही अर्थ,
समझाएगी हमारी यह जोड़ी।
ज़रूर यही कहा होगा कृष्ण ने।
प्रेम का सही अर्थ समझाएगी हमारी जोड़ी।
हमारी जोड़ी।

