Alok Singh
Romance
अधरों से कर अधरों ने बातें,
बातें अधूरी छोड़ गया
ओठों पे रख इश्क़ का चुंबन
प्यासा मुझको छोड़ गया
भर के मुझको बाहों में
तनहा मुझको छोड़ गया
करके खुद को मेरे हवाले
मुझको अकेला छोड़ गया।
रिश्तें
सफलता
उभरते जज्बात
शेर
गणतंत्र _दिवस
मजदूर मजबूर
सॉरी हाथी मेर...
गाँधी
शब्दों की आवा...
तेरे इश्क की मैँ , सबको क्या मिसाल दूँ , किसी को अपने इश्क का ,बोलो क्या जवाब दूँ ? तेरे इश्क की मैँ , सबको क्या मिसाल दूँ , किसी को अपने इश्क का ,बोलो क्या जवाब...
कोई मूर्ति तुमको दे दूं ईश्वर का रूप हो न्यारा कोई मूर्ति तुमको दे दूं ईश्वर का रूप हो न्यारा
मुझसे बड़ा पूछते हो कि मुझे कॉल नहीं करती है मुझसे बड़ा पूछते हो कि मुझे कॉल नहीं करती है
तू चाहता है ....., मैं बैठी रहूं तेरे सामने तू चाहता है ....., मैं बैठी रहूं तेरे सामने
उसी के साथ घूमता था इधर उधर, उसी से मैं मन की बात कहता था। उसी के साथ घूमता था इधर उधर, उसी से मैं मन की बात कहता था।
हमारे साथ किसी का होना ठीक नहीं मेरा अकेला तुम्हें छोड़ जाना ठीक नहीं। हमारे साथ किसी का होना ठीक नहीं मेरा अकेला तुम्हें छोड़ जाना ठीक नहीं।
छू लिया सजन तूने रूह को बन हमकदम। छू लिया सजन तूने रूह को बन हमकदम।
आंखों की गहराई को लिखने जाऊं, तो जुल्फें अपनी और खींचे। आंखों की गहराई को लिखने जाऊं, तो जुल्फें अपनी और खींचे।
आज भी लिख हथेली पर नाम मेरा मेहंदी से उसे छुपाते तो होगे। आज भी लिख हथेली पर नाम मेरा मेहंदी से उसे छुपाते तो होगे।
हां माना थोड़ी पेचीदा है वो। मेरी हर कसम की गीता है वो। हां माना थोड़ी पेचीदा है वो। मेरी हर कसम की गीता है वो।
मैं लफ्जों से कुछ भी इजहार नहीं करता, इसका मतलब यह नहीं कि मैं उससे प्यार नहीं करता! मैं लफ्जों से कुछ भी इजहार नहीं करता, इसका मतलब यह नहीं कि मैं उससे प्यार नह...
तेरी साँसों की सरगम पर मैं अपने प्राणो का विश्वास लिखूं। तेरी साँसों की सरगम पर मैं अपने प्राणो का विश्वास लिखूं।
चाहत भी कितनी अजीब है ना रूकती है ना थमती है। चाहत भी कितनी अजीब है ना रूकती है ना थमती है।
घटाएं सावन की काली घिर के ऐसे आ गई रात अंधियारी को फिर गहरा घना बना गई। घटाएं सावन की काली घिर के ऐसे आ गई रात अंधियारी को फिर गहरा घना बना गई।
तेरा हसँता हुआ सा चेहरा, मेरे अच्छे दिन की निशानी है। तेरा हसँता हुआ सा चेहरा, मेरे अच्छे दिन की निशानी है।
थोड़ा भंग चढ़ा लेना होली के बहाने से। थोड़ा भंग चढ़ा लेना होली के बहाने से।
किसी डायरी के पन्नो पर लिखे दबे हुए से हैं मेरे वो अनकहे शब्द। किसी डायरी के पन्नो पर लिखे दबे हुए से हैं मेरे वो अनकहे शब्द।
गम के साए में भी हमने तो, उनके इंतजार में दम ना तोड़ा। गम के साए में भी हमने तो, उनके इंतजार में दम ना तोड़ा।
क्या ज़माना क्या फ़साना गाँव वाले है कहेगें मैं नहीं हूँ क्या यहाँ पर ग़ैर को वो क्यो दे क्या ज़माना क्या फ़साना गाँव वाले है कहेगें मैं नहीं हूँ क्या यहाँ पर ग़ैर को व...
जिंदगी, क्या है? समय का गुजरना मिलकर बिछड़ना। जिंदगी, क्या है? समय का गुजरना मिलकर बिछड़ना।