STORYMIRROR

Supriya Devkar

Romance Thriller

4  

Supriya Devkar

Romance Thriller

प्यार मे पागल

प्यार मे पागल

1 min
248

मैने गिरकर जाना चोट कहा लगती है 

पर उस चोट का क्या जो दिलको लगी है 


किसको बताये उसका जख्म कितना गेहरा है

कोई दवा काम ना आये तेरी दुवा मे असर ज्यादा है


हिम्मत करके तुझे मै इतना बताना चाहता हूँ 

दिल भी तुम्हारा है और दर्द भी तुम्हीसे है


तुम्हारे प्यार मे पागल है ये दिल बेचारा 

क्यूं सताती हो थोडासा दो उसे सहारा 


मजबूर तेरे आगे पिछे घुमते रेहते है 

तेरे प्यार मे जुदाई दिन रात सेहेते है


खोल दे दिल का द्वार सखी होने दे दिदार तेरे

अब नही सेहेन होता नयन बानोके वार तेरे


समाकर लेलो अपनी बाहोमे बिखेर दो खुशियाँ

प्यार से भरदो झोली खिलने दो नादान कलियाँ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance