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बेज़ुबानशायर 143

Romance Fantasy

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बेज़ुबानशायर 143

Romance Fantasy

प्यार की कश्ती

प्यार की कश्ती

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जब मिले थे तुम कितने खुश थे हम,

तेरी एक नज़र को देखने को तरसते थे हम,

बस एक बार तुझे देख लूं तो सुकून आ जाए,

तेरी मोहब्बत में ऐसे पागल हो गए थे हम,


हर रोज़ बातें करने को ये दिल तरसता था,

तुझ से मिलने को ये दिल करता था,

जिस दिन तू न दिखे, ऐसा क्यों हुआ दिल सवाल करता था,

तुझे कुछ हो जाए तो मेरी आंखें नम हो जाया करती थीं,

तुझे शिफा मिल जाए हर रोज दुआएं मैं करती थी।।



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