प्यार की किश्त
प्यार की किश्त
तुझे पता है जब तेरे निकलने पे ही आ पाता है वो ,
तभी तू खुद पे इतना इतराता है ऐ बेरहम बैरी चांद,
तेरे आने पे ही तो मिलती है मुझे प्यार की वो किश्त,
मन को छूकर गुजरता है जब उसके होने का अहसास,
ऐ बैरी चांद जरा जल्दी आया कर चांदनी से तू मिलने,
ताकि मेरा चांद भी आ पाये प्यार से मुझसे गले लगने!

