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Dr.Purnima Rai

Romance

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Dr.Purnima Rai

Romance

प्यार कभी मिटता नहीं है

प्यार कभी मिटता नहीं है

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सूर्य भी उगा नहीं था

चांद भी छिपा नहीं था

सितारे भी जगमगा रहे थे

आसमान में

प्यार कभी मिटता नहीं है

इस जहान में !


हम हंसते हैं तो सब हंसते है

कभी मत करना ऐसा गुमां

यूँ ही नहीं उठ रही है लपटें

कहीं तो दिल हुआ है धुआं-धुआं !


हवा की मस्तियाँ लुभाने लगी

ख्वाब फिर नये सजाने लगी

महका यह आलम तेरे आने से

रूह को मिला सकूं तुम्हें पाने से !


आंखों की शरारत रास आ गई

मुहब्बत में इबादत समा गई

बेचैन लम्हों सुन लो जरा तुम भी

"पूर्णिमा "की चांदनी लुभा गई !


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