STORYMIRROR

Akanksha Gupta (Vedantika)

Romance

4  

Akanksha Gupta (Vedantika)

Romance

प्यार का मौसम

प्यार का मौसम

1 min
349

तुम्हारे साथ हर लम्हा एक मौसम सा लगता है

मंजिल करीब और रास्ता मुझको दूर लगता हैं

हो जाती हैं जिंदगी गुलज़ार फ़क़त तेरी इन नजरों से

बिन तेरी इनायत-ए नजरों के वीराना सा लगता हैं


गर्मी की तपती दोपहर हैं जैसे रूठना तेरा

जलता है यह दिल हो जाये अंधेरा

मुस्कराना तेरा जैसे सर्दी की ठंडक

हो जाये आतिश वो लम्हा दिल बन जाता हैं बंधक


जुल्फों जब चेहरे पर छिटके सावन की वो बूंदे

बसंत की बहार आ जाये इन पतझड़ से लम्हों में

कर जाए रोशन वो लम्हा जो तेरे साये में गुजरे

गम ना हो फिर जिंदगी में जो चारों मौसम ये गुजरे।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance