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Garima Kanskar

Romance

4  

Garima Kanskar

Romance

प्यार का एहसास

प्यार का एहसास

2 mins
170

पुराने जमाने मे आज की तरह लड़का लड़की नही मिलते थे

उनकी शादी उनके घरवाले ही तय करते थे

दूल्हा दुल्हन शादी के मंडप पे ही मिलते थे

मेरी भी शादी मेरे माता पिता ने एक सँयुक्त परिवार में कर दी

भरा पूरा परिवार सभी लोग बहुत ही अच्छे

पर सब कुछ नियमो में दायरों मे बंधा हुआ था

धीरे धीरे मुझे भी उन नियमो की आदत हो गई

घर के काम तक ही मेरी दुनियाँ सिमट गई

धीरे वक्क्त बीतता गया जेठ जिठानी ,

देेेवर देवरानी के बच्चे बड़े हो गए

जगह कम पड़ने लगी सभी अपने नए घर मे चले गये

और घर मे कभी न भरने वाला सूनापन छोड़ गये

हमारी कोई औलाद नही थीमेरे पति काम और फाइलों में उलझे रहते

कभी मुुुझे ढंग सेे निहारा भी नही

मैं भी मन को समझा कर घर और

सास ससुर की सेवा में अपना वक्क्त बिताने लगी

फिर मेरे रिटायर्ड हुयेउसके दूसरे दिन मेरे लिये

बहुत प्यारी साड़ी लाये और कहा इसे पहन गार्डन पर आओ

चाय के साथ पकोड़े भी लाना

हम झूले पर बैठ साथ साथ खायेंगे

मैं एक पल को तो देखती ही रह गई

की इन्हें क्या हो गया हैइस उम्र में

फिर चाय और पकोड़े ले कर में गई

तो मुझे वो देखते ही रह गयेऔर कहने लगे

तुम्हारे ऊपर लाल रंग बहुत अच्छा लगता है

मुझे पता है तुम्हे ज्यादा सजना सबरना पसन्द नही

फिर भी तुम बहुत खूबसूरत लगती हो

मैं तुमसे बहुत कुछ कहना चाहता हूँ

अब हर पल हम साथ बिताएँगे

अभी तक के सालो के जो भी शिक़वे शिकायतें है

वो सब मैं दूर कर देना चाहता हूँ

मुझे आपसे कोई शिकायत नही है

बस मुझे आपसे बहुत प्यार है

आपकी परवाह है,हम साथ साथ रहेंगे

मैं खुशकिस्मत हूँ किउम्र के इस पड़ाव में 

आप मेरा इस तरह से ख़्याल रख रहे हैं

मुझे प्यार कर रहे हैं

प्यार तो तुम्हारे मेरे दरमियाँ हमेशा से था

बस एहसास वृद्ध अवस्था मे हुआ है!


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