STORYMIRROR

S N Sharma

Tragedy

4  

S N Sharma

Tragedy

प्यार है गर रूह तो

प्यार है गर रूह तो

1 min
5

इश्क में इस तरह इल्जाम हम सहते रहे।

वफा हम करते रहे वह बेवफा कहते रहे।


बोझ है मजबूरियों का ये नही जाने सनम।

तोहमतों की बाढ़ में अरमान मेरे बहते रहे।


मां बहन भाई मेरे अपने हैं ये समझे न वो।

पर उनके सपने सिर्फ मेरे वास्ते रहते रहे।


जिंदगी की उलझने उनकी थी मेरी भी थी।

भूले हकीकत को ख्याली लोक में रहते रहे


प्यार है गर रूह तो कर्तव्य भी तो देह है।

रिश्ते इन दोनो के दुनिया में सदा रहते रहे।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy