पुरानी यादें
पुरानी यादें
घेर लेती हैं अक्सर
पुरानी यादें उस वक़्त
जब रहता है व्यक्ति
उदास, अकेला, गुमसुम
उलझा होता है वो
उन पुरानी यादों में
जब उसकी परवाह
करने वाले सैकड़ों
व्यक्ति होते थे.…..
प्यार के सागर में
जहां वो हर समय
गोता लगाया करता था
मुस्कुराया करता था..….
खेलता था अपने
मनपसंद खेल,
अपने ही अंदाज़ में
अपने जिगरी दोस्तों के साथ
खिलखिलाया करता था.....
मां के हाथों से बने
स्वादिष्ट पकवान,
मां के हाथों से खाया करता था
आंचल में अपना मुंह छुपाया करता था..
पिताजी की मार से
सिहर उठता था
दुनिया की सच्चाई से
अवगत हुआ करता था..
भाई-बहन के साथ
हर रोज़ झगड़ता था
मगर उनसे दूर जाने का
कभी ना ख़्वाब बुनता था..
लेकिन उम्र के एक पड़ाव में
काल्पनिक प्रेम सच्चा लगता है
गलतियों को फिर से दोहराना
उसे बड़ा अच्छा लगता है......
कुछ अरसा बीत जाने पर
ताश का महल बिखर जाता है, और
जाग जाती है छवि, पुरानी यादों की
अपनों की सच्चाई, प्रेममयी बातों की
मेरे प्यारे दोस्तों! ज़िंदगी बड़ी हसीं है
जियो खुल कर इसे, इसमें क्या कमी है
संजो कर रखना अपनों की, अच्छी यादों को
साथ रहना परिवार के, सुनना उनकी फ़रियादों को।
