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DR ARUN KUMAR SHASTRI

Romance

3  

DR ARUN KUMAR SHASTRI

Romance

पुराने दिन

पुराने दिन

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मुझे तुमसे गिला न कोई

न तेरे तौर तरीके से //

मुझे तो एक शिकवा है

पुराने दिन हैं कहाँ वो अब //

मिरी फितरत मैं गोया सादगी

का कुछ मिकदार ज्यादा है //

तबीयत तेरी भी तो कोई

नहीं लुकमा हकीकी है //

मैं कैसे भूल जाऊं वो

पुराने दिन मोहब्बत के //

वो तेरा रूठना पल पल

के मेरा भीगना तिल तिल //

चलो छोड़ो शिकायत अब

कसीदा फिर से पढ़ते हैं //

गली के मोड़ पर आकर

गले फिर से मिलते हैं //

मुझे तुमसे गिला न कोई

न तेरे तौर तरीके से //

मुझे तो एक शिकवा है

पुराने दिन हैं कहाँ वो अब //



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