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निशा परमार

Abstract

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निशा परमार

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पुनर्जन्म

पुनर्जन्म

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चलो आज अपना पुनर्जन्म करते हैं

समस्त दोष विघ्न विकारों का दहन करते हैं।


अपवित्र तिमिर रज नहीं चढ़ने देंगे अपनी आत्मा पर

चलो नैतिकता मानवता कर्मठ्ता से अभिषेक करते हैं

चलो आज अपना पुनर्जन्म करते हैं।


निम्न सोच का प्रवाह नही बहने देंगे अपने मस्तिष्क पर

चलों स्वछ्न्दता ज्ञानता श्रेष्ठता का तिलक करते हैं

चलो आज अपना पुनर्ज्नम करते हैं।


काम क्रोध माया मोह के जाल नहीं पडने देंगे व्यक्तित्व पर

चलो निस्वार्थत निष्कांमता मोक्षता के चौक पूरते हैं

चलो आज अपना पुनर्जन्म करते हैं।


भय चिंता अज्ञानता के छींटे नही पडने देंगे अस्तित्व पर

चलो साहसता हर्षता सफलता के मंगल गान गाते हैं

चलो आज अपना पुनर्जन्म करते हैं।


 


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