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Deepali Mathane

Abstract

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Deepali Mathane

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बिंदिया

बिंदिया

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ये जो तेरी बिंदिया है तेरे माथे का साज सजाती है

अपने संस्कारों का परिचय जिस दिन मुझे कराती है


चाॅंद जैसे मुखडे पे हर पल चाॅंदनी सी चमकती है

अपने संस्कारो के मोतियों से पल पल महकती है


साज-शृंगार को तुम्हारे नीत चार चाँद लगाती है

लाल रंगकी छोटी बिंदिया हर रंग को अपनाती है


वादा है ये जनम-जनम का सात जन्मों के वचन निभाती है

महकें घर-ऑंगन जिसकी खुशबू से वो ऐसा रूप दिखाती है


हर सुहागन के माथे पर सिंदुर की लाली बनके चमकती है

तेरी बिंदियाॅं मेरे वजूद का हिस्सा बन माथे पर ही दमकती है.


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