पुलवामा के वीर
पुलवामा के वीर
प्रेम के इस अवसर पर तुम भूल न जाना उन जवानों की शहादत को,
जो जाते जाते भी मात दे गए पुलवामा में आई आफत को।
प्रेम के ही दिन जो कर बैठे मौत से सौदा अपना
देश प्रेम दिखाने की चाहत को।
तहे दिल से शीष झुकाकर नमन है भारत माँ
के उन वीर सपूतों को,
जो दे गए बलिदान मगर झुकने ना दिया
अपने वतन की अमानत को।।
करते हैं हम सलाम हर एक जाँबाज़ फौजी की ताकत को,
जो कर देते हैं ढेर हर आतंकी की सीमा पार आने की हिमाकत को।
यूं पीठ पीछे वार कर बता गए तुम अपने गीदड़ होने की बात को,
हम हैं वो हिन्दुस्तानी जो डरते नहीं और ले गए बदला
हर एक अपने जवान का वो भी आधी रात को।।
गीदड़ कभी शेर नहीं बनता इसलिए
जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी डाल ले हमसे हारने की आदत को ,
क्योंकि तेरे मंसूब इरादों को ही नापाक करना दर्शाता है
हमारा अपने देश के प्रति चाहत को।।
और दोस्तों आप सब से यही कहना चाहूँगी
की चलना हमेशा वतन की राह पर
जहाँ मौत भी राहत हो,
ये वो वतन है जहाँ लोग नहीं मांगते तिरंगे पर फिदा होने की इजाज़त को।
उन्हीं वीरों की भांती
कभी फीकी मत पड़ने देना अपनी अपने देश के प्रति चाहत को,
हमारी औकात से बाहर दे गए ऋण सौंपकर प्राण भारत को,
ऋण तो नही चुका पायेंगे पर हर पल अपना तिरंगा ऊंचा ज़रूर लहराएंगे,
मगर कभी यूं ही व्यर्थ नही जाने देंगे अपने वीरों की शहादत को।।
अपने वीरों की शहादत को।।
