STORYMIRROR

Neetu Lahoty

Drama

3  

Neetu Lahoty

Drama

पत्थर हो जाना सीख़ रहा हूँ

पत्थर हो जाना सीख़ रहा हूँ

1 min
179

मन को वश में करना सीख़ रहा हूँ

मैं खुद को पढ़ना सीख़ रहा हूँ। 


आसान नहीं होता,

खुद को खुद से ही जीतना, 

मैं ये भी हुनर सीख़ रहा हूँ।


आहिस्ता-आहिस्ता

बदल रहा हूँ खुद को,

खुद से ही लड़ना सीख़ रहा हूँ। 


मैं इंसान से पत्थर हो जाना

भी सीख़ रहा हूँ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama