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Brijlala Rohanअन्वेषी

Tragedy

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Brijlala Rohanअन्वेषी

Tragedy

पश्चाताप

पश्चाताप

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कुछ नहीं बचा पश्चाताप के सिवा मेरे पास!

एक गलती ने हमें आज कहाँ ला खड़ा कर दिया ,

मैं कैसे उन भावों को शब्दों में बयां करूँ जो हमपे गुजर रही !  

निराशा के इस क्षण में मन व्याकुल रहता है हरपल!

हरपल यही सोचता रहता क्यूँ हुआ ऐसा हमारे साथ?

हमने क्या किसी का बिगाड़ा था ?

मैं चाहकर भी नहीं रोक पाता खुद को!

हरदम यही मन में चलते रहता है, कि ऐसा नहीं करते तो ऐसा नहीं हो पाता!

मेरी इस लापरवाही का नतीज़ा इतना भयानक होगा मुझे इसका अंदाजा तक नहीं था !

एक पल में सबकुछ इतना बदल जाएगा, 

मुझे सचमें इल्म तक न था!

मुझे माफ़ करना साथी ! मेरी एक ग़लती ने हमें कितना दूर ला खड़ा कर दिया !

 अब आंसू ,पश्चाताप , के सिवा और कुछ भी तो नहीं मेरे पास!

ईश्वर से बस यहि प्रार्थना है काश! सबकुछ अच्छा हो जाए ! 

हमने जो भी कभी कुछ अच्छे कर्म किए हों इसका फल हमें अभी ही मिल जाए!

काश! सबकुछ अच्छा हो जाए ।।


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