STORYMIRROR

Nalanda Satish

Tragedy

4  

Nalanda Satish

Tragedy

प्रवासी

प्रवासी

1 min
141

बड़ी शानो शौकत से अखबारों का बाजार है चलता

धुआँ धुआँ ही सही मगर समाचार है निकलता

 

हवाई जहाजो मे आनेवाला कालीन पर है चलता 

व्यवस्था को अर्थ देनेवाला मजदूर प्रवासी भर है निकलता 


हंसी खुशी सब बिकाऊ पैर का छाला भक्त निकला

परिक्रमा चाहे जितनी करो विदेशो से हाथ खाली है निकलता 


ताली बजाते फुल बरसाते शहर भर जलसा चलता है 'नालन्दा'

ताले सबके अक्ल पर जड़े कुछ भी बोल नही है निकलता।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Nalanda Satish

Similar hindi poem from Tragedy