परवाह नहीं उसकी सबको..! Prompt 25
परवाह नहीं उसकी सबको..! Prompt 25
उन्हें सर्वगुण संपन्न की चाह है
परवाह नहीं सर्वगुण संपन्न के आह की..!
वो घर संभाले /
संभाले उनके बेतुके माँग को भी
रखे हाथ सबके हुकूमत को
देखे उनके बिखरे टूटे-फूटे / कटे-फटे आसमान को
रफ़ू करे उनके फटे चिथड़े रिश्तों को
और सहेजे उनके तिनके तिनके आन को
उसकी चाहत / उसकी ख़ुशी
कुशलता उसकी है किसमें
परवाह कहाँ किसी इंसान को
वो भी रखती है एक मासूम सा दिल/
एक नन्ही सी हसरत /
कुछ झिलमिलाते सपने हैं
उसकी भी पलकों पे सजे ये देखे कौन
जिम्मेदारियाँ उठाये मजबूत नाज़ुक कँधों पर वो
नैन के सावन भादों
मन के विकल तान उसके सुने कौन..?
वो चाहती है छेड़ना राग यवन
फैलाना चाहती है हर तरफ राग भैरवी
जलाना है उसको दीपक राग से चिराग
उसके इस रुदन को गुने कौन...?
वो भी है किसी बाग की सुकुमारी
बना दिया है तुमने उसको क्यों इतना बेतान
उसे उड़ने दो
उसे गुनगुनाने दो
बरसने दो उसे हर तरफ घनघोर बदरी बन
मन मयूर को उसके पंख पसार नाचने दो जीभर
वो आयेगी उमङ कर तुम्हारे लिए
हर तरफ सुख सम्पदा / खनकती ख़ुशियाँ लेकर
उसे उसके मन के संगीत सुनने दो
वो तुम्हारे जीवन में
प्रेम का सकल साहित्य उड़ेल देगी
तुम्हें अर्थ के सारे मानदण्ड समझायेगी
उसे बढ़ने तो दो
वो तुमको विकास के सारे अध्याय बतायेगी
गीता भर देगी तुम्हारे जीवन में
घर अयोध्या सा मन राम राम कर देगी
बस उसे उजाड़ो नहीं
उसे अपने मन का वृंदावन चुनने दो
उसे भी समझ मन को मनमानी करने दो
केवल अपनी आह नहीं उसकी चाह को समझो..!
