STORYMIRROR

Sandeep Murarka

Tragedy Others

3  

Sandeep Murarka

Tragedy Others

दियासलाई

दियासलाई

3 mins
577

क्या दियासलाई ख़त्म हो गई

जाओ जल्दी जाओ

और एक नई 

और बड़ी

दियासलाई लेकर आओ

जिससे जला सकें 


कुछ और मकान

और दिखाकर जिसे 

लड़ा सकें इन्सान

जाओ जल्दी जाओ 

और एक नई 

और बड़ी


दियासलाई लेकर आओ

जब वे मूर्ख लड़ेंगे 

तभी ना हम राज़ करेंगे

और हाँ 

कमरे में किसी कॊ 

आने मत देना


फादर आज आयें हैं 

कुछ नई चर्चा लाये हैं

और हाँ 

आज जाना तुम उस बस्ती में 

चर्च की दीवार जहाँ ख़त्म होती

जाओ जल्दी जाओ 


और एक नई 

और बड़ी

दियासलाई लेकर आओ

मौलवी साहब से 

हो चुकी बात मेरी

पण्डित जी कॊ 


ख़बर तुम भिजवा देना

कमरे में पीने खाने का 

समान तुम सजावा देना

हुए दिन कई 

आज मेरी बारी है


अब करो ना विलम्ब तुम 

काम कई निपटाने हैं

जाओ जल्दी जाओ 

और एक नई 

और बड़ी


दियासलाई लेकर आओ

और हाँ 

रद्दी में होंगे पड़े 

कुछ अखबार पुराने 

वो भी ला देना


छूट ना जाय विषय कोई 

तुम मुझको याद दिला देना

हो नहीं कोई गलती इसबार 

करनी हैं पक्की अगली सरकार


जाओ जल्दी जाओ 

और एक नई 

और बड़ी

दियासलाई लेकर आओ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy