STORYMIRROR

Yashpal Singh

Romance

3  

Yashpal Singh

Romance

प्रिये

प्रिये

1 min
428

मैं शिव की धुनी में अर्पित महाश्मशान की लकड़ी हूँ,

तुम शिव के मस्तक पर स्थित शीतल पावन गंगा हो।

मैं साक्षात् आवाहन अग्नि देव का,

तुम परम शीतलता की मूरत हो।

मैं जन्म-जन्मान्तर से जल रहा,

तुम धरणी की प्यास बुझाती हो।

प्रिये, एक बूँद अपने अमृत का,

मुझ पर  भी  बरसा दो  तुम।

अंतर्मन की इस असहनीय वेदना से,

मुझको  मोक्ष दिलवा  दो  तुम।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance