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Yashpal Singh

Abstract

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Yashpal Singh

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गाँव

गाँव

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फिर तो बस यादें ही रह गयी

वो स्कूल, वो पगडंडियाँ, वो बारिश

जब शहर आया

तो गाँव चला गया,

चुपके से 

बहुत दूर, 

अपने मिट्टी के घर, तुलसी के चौरे समेटे

शायद कभी वापस ना लौट आने को।


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