“परिंदे की अभिलाषा”
“परिंदे की अभिलाषा”
मुझे दूर क्षितिज में उड़ने दो
जो मन करता है करने दो
ना रोको ना टोको मुझको
मुझे नील गगन को छूने दो
मैं उड़ना चाहूँ देश देश
दीवारें हमको ना रोके
भेद नहीं करना आता
कोई मुझे कितना टोके
उड़ उड़ कर जग में घूमने दो
सब धरती को मुझे चूमने दो
ना रोको ना टोको मुझको
मुझे नील गगन को छूने दो
संदेश प्यार का देना है
बीज शांति का बोना है
नफरत को दूर भगा के
प्रगति केवल चुनना है
बात मुझे सबको समझने दो
खुशियों के पल तो आने दो
ना रोको ना टोको मुझको
मुझे नील गगन को छूने दो
भाषाएं हैं अलग अलग
फिर भी सबको जानते हैं
वेष हमारे अलग थलग
लोगों को पहचानते हैं
उन लोगों में प्यार बढ़ाने दो
नफरत की दीवार गिरने दो
ना रोको ना टोको मुझको
मुझे नील गगन को छूने दो
जग में हो सबका विकास
कोई वंचित ना रह पाए
पर ध्यान रहे कार्बन का
उत्सर्जन कभी ना हो पाए
मुझे प्रकृति के गुण गाने दो
पर्यावरण मंत्र को सुनने दो
ना रोको ना टोको मुझको
मुझे नील गगन को छूने दो
मुझे दूर क्षितिज में उड़ने दो
जो मन करता है करने दो
ना रोको ना टोको मुझको
मुझे नील गगन को छूने दो !!
