STORYMIRROR

Shivanand Chaubey

Romance

3  

Shivanand Chaubey

Romance

प्रेम

प्रेम

1 min
216

चले थे प्रेम करने हम फ़ना होकर के आये हैं

हम उनके नफरतों में खुद को यू खोकर के आये हैं

कितनी नादान हैं मांगी जां मेरा शौक से ये कुर्बान हैं

तेरी यादों की कब्रो पे यू हम सो कर आये है

भुला दे हम तुम्हे कैसे कभी ये हो नही सकता

तेरी यादो की मोती को पिरोकर के हम आये है

मेरे मन के मन्दिर में बसी तेरी ही मूरत है

तेरी यादो की कस्ती को हम संजोकर के आये है

खफ़ा हम हो नही सकते हमारी जां की जां है वो

बेशक वो हँस रहे दिल से शिवम् हम रो कर आये हैं ! !



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance