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Meena Mallavarapu

Romance

4  

Meena Mallavarapu

Romance

प्रेम

प्रेम

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ज़िंदगी की उबड़ खाबड़ राहों पर, 

निकल पड़ते दो दिल- मालूम नहीं

कैसा होगा जीवन का सलूक मगर

तैयारी थी जूझने की , था उन्हें पता

अड़चनों के बिना सफ़र ही नहीं

प्यार भी था तकरार भी,जीत हार भी

बाहों में डाले बाहें हमें निकल आए पार

सालों साल के साथ ने प्यार का सार,

परवाह के मायने ,तकरार की हार

की दी अद्भुत सीख-आज झगड़े बेकार


ज़रा सी अनबन देती है आज नया एहसास

अब नाराज़गी नहीं-एक मुस्कान अंदर ही अंदर

दो पल भी न लगेंगे ज़रूरत आन पड़ेगी खास

छोटी छोटी बातों के लिए एक दूजे पर निर्भर

कौन सहे शिकवों शिकायतों के झंझट का त्रास


घंटो लंबी मायूसी के लिए अब मन में जगह नहीं

कल अपना है या नहीं जानता कोई नहीं

ज़िंदगी भर के साथ का मान रखें हम कैसे नहीं

प्रेम का सार ,उसकी परिभाषा ही बदल गई 

जीवन भर का साथ-अब शिकवा शिकायत नहीं

देना सीख लिया, अब अपेक्षाएं नहीं!



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