" प्रेम की पुकार "
" प्रेम की पुकार "
कहाँ तुम हो चले आओ
हमारा दिल नहीं लगता
जरा भी देर ना करना
हमें कुछ भी नहीं भाता !!
हमें चाहत थी मिलने की
तुम्हारे पास हम आये
सँजोये प्रेम को सब दिन
उसे हम साथ अब लाये !!
ये दूरी अब नहीं हमसे
सही जाती बताओ तुम
करो कोई यत्न ऐसा ही
हमें जीना सिखाओ तुम !!
तुम्हारे बिन अधूरा सा
लगे हमें चाँदनी रातें
सुनेगा कौन तेरे बिन
हमारी प्यार की बातें !!
कसम से हम ये कहते हैं
चलेंगे सँग ही रहकर
कभी ना साथ छूटेगा
रहेंगे साथ ही मिलकर !!
कहाँ तुम हो चले आओ
हमारा दिल नहीं लगता
जरा भी देर ना करना
हमें कुछ भी नहीं भाता !!

