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Brijlala Rohanअन्वेषी

Romance

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Brijlala Rohanअन्वेषी

Romance

प्रेम की प्रतिमूर्ति

प्रेम की प्रतिमूर्ति

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जिसे देख कुदरत भी शर्माए ,

वैसी मनोहर प्रकृति हो तुम।

मेरी सुकून की साक्षात् प्रतिमूर्ति हो तुम ,

जिसे शब्दों में बयां न किया जा सके वैसी खूबसूरती हो तुम ,

सिर्फ रंग- रूप से ही नहीं रूह से भी कुदरती हो तुम।

मेरे कलम से रोज गढ़ी जानेवाली कलाकारी हो तुम ,

मेरे अल्फ़ाजों के रंगो से बनी अविस्मरणीय चित्रकारी हो तुम।

मेरे दिल की अफ़साना भी तुम ,

जीने का एकमात्र जरिया ,

साथ मिलकर खुद को खूबसूरती के रंग में रंग-के दूसरे के

अधरों पर भी मुस्कान लाने वाली बेहतरीन नज़राना भी तुम।

मेरे दिल में छिपी शराफ़त भरी शरारती भी तुम।

 


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