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अंकित शर्मा (आज़ाद)

Romance Classics

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अंकित शर्मा (आज़ाद)

Romance Classics

प्रेम : गुलाब (🌹)

प्रेम : गुलाब (🌹)

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फूल है गुलाब का थाम लीजिए

एक बार ही सही, मेरा नाम लीजिए


कहना तो था मुझे बहुत

शायद कह पाऊं ना

जिन जंजीरों में जकड़ा हूं

उन्हें तोड़ पाऊं ना

इस फूल से मेरे दिल का पैगाम लीजिए,

फूल है गुलाब का बस थाम लीजिए।।


लाल रंग की नाजुक पत्री

कुछ तो कहती है

महक तेरी यादों की दिल में

हरदम रहती है

इन अहसासों को कोई तो अब 

नाम दीजिए 

फूल है गुलाब का बस थाम लीजिए....


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உள்நுழை

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